भोपाल गैस कांड
पीड़ित स्वयं भटक गए हैं या फिर उन्हें भटकाया जारहा है ये बात समझ के परे है. जब से अदालत का फैसला आया है तब से भोपाल गैस कांड पीड़ित सिर्फ इसलिए आंदोलित हैं की आरोपियों को कम सजा मिली,वो यह क्यों नहीं सोचते की यदि आरोपियों को फांसी भी होजाती तो इनको क्या मिलता .इनकी लड़ाई तो यह होनी चाहिए की हमें क्या सुविधा दी गई .क्या अदालत के फैसले में कहीं ये ज़िक्र है की =
- पूरे प्रभावित वार्डों को मुआवजा क्यों नहीं मिला (इस बात का आजतक किसी ने भी जवाब नहीं दिया )
- स्वास्थ्य सेवाओं में वृद्धि क्यों नहीं हुई
- सभी पीड़ितों को उनके निवास पर स्वास्थ्य कार्ड मुहैया क्यों नहीं करे गए, उन्हें इसके लिए भी भटकना पड़ रहा है
- मुआवजा राशी भी अंत तक तय नहीं हुई,इस फैसले में इसे बढाया जा सकता था.
इन बातों के पीछे क्या राजनीती है पता नहीं .क्यों संगठन,प्रशासन , मंत्री,अदालत व् मीडिया
किसी ने भी ऐसा नहीं सोचा ??????????