पर्यावरण दिवस पर मेरे द्वारा लिखी गई कविता
सुनो सुनाएँ एक कहानी
इसमें राजा है न रानी
ये हम सब की है नादानी
कहीं बाढ़ है कहीं न पानी
जंगल में जब रहेगा मंगल
तभी रहेगी खुशहाली
पेड़ कटे यदि जगह जगह से
बनी रहेगी बदहाली
जल ही जीवन है ..हम
सुनते आए हैं ये बरसों से
तब भी हम ये कहते हैं
हाँ सोचेंगे कल परसों से
डॉ सत्येन्द्र खरे ..
