मंगलवार, जून 05, 2012

पर्यावरण दिवस पर मेरे द्वारा लिखी गई कविता 
सुनो सुनाएँ एक कहानी 
इसमें राजा है न रानी 
ये हम सब की है नादानी 
कहीं बाढ़ है कहीं न पानी 

जंगल में जब रहेगा मंगल 
तभी रहेगी खुशहाली 
पेड़ कटे यदि जगह जगह से 
बनी रहेगी बदहाली 

जल ही जीवन है ..हम 
सुनते आए हैं ये बरसों से 
तब भी हम ये कहते हैं 
हाँ सोचेंगे कल परसों से 

डॉ सत्येन्द्र खरे ..

गुरुवार, अप्रैल 26, 2012

आज सुबह जब मैं सो रहा था ,तो मेरे पैरों पर मुझे नन्हे हाथों का स्पर्श महसूस हुआ ,देखा तो पाया की मेरा पुत्र पैरों के पास  बैठा हुआ है और मेरे पैर दबा रहा है .मैंने पूंछा कि बेटा क्या कर रहे हो ?वो बोला.... कुछ नहीं ....ऐसे ही ...और मैंने देखा की मेरी आँखों में नमी बढ़ चुकी थी .....हाँ मुझे याद आया कि कई  बार सोते समय जब उसके पैर दुःख रहे होते तो मै दबा दिया करता ..

बुधवार, जनवरी 04, 2012

jyotish

यदि आप किसी विषय को नकारना चाहते हैं ,तो आप को उस विषय का पूरा ज्ञान होना ज़रूरी है .