मंगलवार, जून 05, 2012

पर्यावरण दिवस पर मेरे द्वारा लिखी गई कविता 
सुनो सुनाएँ एक कहानी 
इसमें राजा है न रानी 
ये हम सब की है नादानी 
कहीं बाढ़ है कहीं न पानी 

जंगल में जब रहेगा मंगल 
तभी रहेगी खुशहाली 
पेड़ कटे यदि जगह जगह से 
बनी रहेगी बदहाली 

जल ही जीवन है ..हम 
सुनते आए हैं ये बरसों से 
तब भी हम ये कहते हैं 
हाँ सोचेंगे कल परसों से 

डॉ सत्येन्द्र खरे ..

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